Sunday, September 18, 2022

आगमादि धर्मशास्त्र एवं उसका अनुसरण करने वाली सामाचारी के अनुसार आराधना करने वाले- कराने वाले जैन संघों की महारथयात्रा “२५ सितंबर” आगामी रविवार को दक्षिण मुंबई के महामार्गों पर निकलेगी


मुंबई, 18 सितंबर 2022 (APN):
 मुंबई महानगर ने पिछले काफी वर्षों में देखी ना हो ऐसी एक अभूतपूर्व महा रथयात्रा आगामी “२५ सितंबर” रविवार को मुंबई के मध्यवर्ती महामार्गों पर जैन शासन का जय जयकार करते हुए निकलेगी. सुबह 8.30 बजे चंदनबाला जैन संघ, वालकेश्वर से महा रथयात्रा प्रयाण करेगी, जिसके दर्शन के लिए महाराष्ट्र- गुजरात -कर्नाटक आदि राज्यों और मुंबई के प्रत्येक उपनगर से भाविकों के बड़ी संख्या में आने की जानकारी मिली है.

 चंदनबाला- मलबार हिल से प्रारंभ होने वाली यह महा रथयात्रा चौपाटी- सुखसागर-गिरगांव, खेतवाड़ी-सी.पी टैंक होकर मुंबई के मध्यवर्ती महामार्गों को पावन कर भूलेश्वर- मोतीशा लालबाग जैन मंदिर पर संपन्न होगी, उसके बाद विराट धर्मसभा का आयोजन होगा, हजारों साधर्मिकों को बैठाकर साधर्मिक भक्ति का आयोजन होगा और शाम को चंदनबाला जिनालय में महापूजा का आयोजन होगा..

जैन आगमादि धर्मशास्त्रों और उसका अनुकरण करने वाली सामाचारी के अनुसार आराधना करने वाले- कराने वाले बृहद मुंबई के संघ और समस्त संघ के आराधकों द्वारा इस रथयात्रा का महा आयोजन श्री पर्युषण महापर्व के निमित्त बृहद मुंबई में हुए तपश्चर्याओं के अनुमोदनार्थ एवं श्रावक जीवन के वार्षिक कर्तव्य के पालनरूप में किया गया है...

तपागच्छ के सबसे सुविशाल 'सूरिरामचंद्र' समुदाय के सौभाग्यी महानायक गच्छ सम्राट पू. आ. भ. श्रीमद् विजय पुण्यपालसूरीश्वरजी महाराजा आदि मध्य मुंबई में चातुर्मास विराजमान अनेक पूज्य आचार्य भगवंत आदि साधु-साध्वीजी विशाल संख्या में पधार कर इस महा रथयात्रा में निश्रा प्रदान करेंगे. 

महाराष्ट्र के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री तथा VVIP मेहमान आध्यात्मिक लाभ हेतु रथयात्रा में पधारेंगे तथा जैन बंधु हजारों की संख्या में उपस्थित रहकर शासन की शोभा बढ़ाएंगे. इंद्रध्वजाएं, 50 से अधिक संघ की बगीया, 30 से अधिक दीक्षार्थी, चौमुखजी परमात्मा आदि सैकड़ों रचनाएं, पुलिस बैंड, पूना की ढोल आदि वाद्यवृन्दों, अनेक प्रकार की दुर्लभ मंडलियां, ध्वजा लहराते युवाओं- पाठशाला के बालको, हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा, परमात्मा के रथ आदि अनेक प्रकार की विशेषताओं से सुशोभित बनने वाली इस रथयात्रा को वास्तविक अर्थ में महा रथयात्रा का दर्जा देने वाली सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यह पूरी रथयात्रा जैनधर्म के मूलभूत सिद्धांतों- आदर्शों को ध्यान में रखकर उसका पूर्णत: पालन के साथ निकलेगी.

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